Monday, 30 May 2011

पत्थर हो गयी हूँ ......$oni.




ख़्वाबों  की दुनियाँ में 
आज 
एक तूफ़ान आया था 
खुली आँखों से 
एक भयानक 
ख्वाब आया था 
मन  था मेरा 
ऐसी नाव पर सवार 
जिसमें न नाविक था 
और न थी  पतवार 
फंस गयी थी  नाव 
मेरी बीच मंझधार 
मैं चिल्ला रही थी 
बार - बार .
बचाओ  मुझे बचाओ ...

पर नहीं हुआ किसी को 
मेरी बात पर यकीन 
और डूब गयी 
नाव मेरी 
ऐसी नदी में 
जो थी जलहीन ...

बिना  पानी के आज 
मैं खो गयी हूँ 
पत्थर तो नहीं थी 
पर आज हो गयी हूँ ...




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