हर सितम तेरा सहती हूँ देखा नहीं
मै भी इन्सान हूँ तूने सोचा नहीं
तेरा सौदाई हूँ तेरा सौदा नहीं
अपने मासुका को तूने ख़रीदा नहीं
जान दे दी मोहब्बत में जिस के लिये
मेरी मय्यत में वो शख़्स आया नहीं
मेरा टूटा हुआ दिल वो समझेगा क्या
शीशा टूटा हुआ जिसने देखा नहीं
कितना बेदर्द वो इंसान था
मेरी बरबादियों में जो रोया नहीं
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